'काय बड्डे', की गूँज से सराबोर बड्डापुर जिले का बडवानी इलाका पौ फटने से लेकर रात होने तक बड्डामय रहता।
सावन के आखिरी सोमवार की तड़के सुबह , रग रग में बहने वाले और हमेशा बहार आने को आतुर अपने "तकिये कलाम" को लिए बड्डों के बड्डे ,,,"बड्डन भैया" की तेजस्वी आँखें बडवानी में खुल पड़ीं।
सावन के आखिरी सोमवार की तड़के सुबह , रग रग में बहने वाले और हमेशा बहार आने को आतुर अपने "तकिये कलाम" को लिए बड्डों के बड्डे ,,,"बड्डन भैया" की तेजस्वी आँखें बडवानी में खुल पड़ीं।
विशालकाय कालिभुजंग कद काठी वाले बड्डन भैया, दातून फसाए और रस्ते में अन्यागिनत बार बड्डा जयराम करते हुए घोंघा नदी के ज्वाला तट पर स्नान हेतु पहुँचते ही मन ही मन नदी को अपना तकिया कलाम सुनाते हुए कूद पड़े।
स्नानोपरांत, उँगलियों में आधा दर्जन अंगूठियां और गले में सोने की सांकल (जिसकी किशतें बड्डन भैया को सताती रहती) पहने बड्डन भैया माथे पर भगवा तिलक और सफ़ेद कमीज पर भगवा गमछा (जिसे गूगल मैप में सॅटॅलाइट व्यू से भी देखा जा सकता था) डालकर बडवानी में स्थित सुप्रसिद्ध होटल "एक नं भैया" पोहा-जलेबी खाने पहुंचे।
""""इससे पहले की तकिया कलाम मुख से बहार आता, होटल के नौकर पुत्तन ने 5 प्लेट पोहा और आधा किलो जलेबी बड्डन भैया के सामने रख उन्हें शांत किया।
""""इससे पहले की तकिया कलाम मुख से बहार आता, होटल के नौकर पुत्तन ने 5 प्लेट पोहा और आधा किलो जलेबी बड्डन भैया के सामने रख उन्हें शांत किया।
नाश्ता कर बड्डन भैया , अपनी बुलेट गाड़ी जिसके कलपुर्जों की सुनहरे रंग से कोटिंग की गयी थी पर सवार , जंभूरि चौक स्थित अपनी दूकान के लिए निकले,
रास्ते में "रावण कार ड्राइविंग स्कूल" की "ठोक्दो k10" में ड्राइविंग सीख रही मिसिज़ कालापानी से धोखे से बड्डन भैया की बुलेट छु गयी,
और बस आख़िरकार सुबह से अंदर ही अंदर कुलबुलाता बड्डन भैया का तकिया कलाम हुंकार भरता, आसमान में गर्जना करता हुआ , किसी एसिड की बारिश की तरह दोनों पर बरस पड़ा,,,,,,,,,
"""""ए ए ए एई ई ई ......."तुम लोग जानते नहीं मैं कौन हूँ"।
रास्ते में "रावण कार ड्राइविंग स्कूल" की "ठोक्दो k10" में ड्राइविंग सीख रही मिसिज़ कालापानी से धोखे से बड्डन भैया की बुलेट छु गयी,
और बस आख़िरकार सुबह से अंदर ही अंदर कुलबुलाता बड्डन भैया का तकिया कलाम हुंकार भरता, आसमान में गर्जना करता हुआ , किसी एसिड की बारिश की तरह दोनों पर बरस पड़ा,,,,,,,,,
"""""ए ए ए एई ई ई ......."तुम लोग जानते नहीं मैं कौन हूँ"।
गर्जना से मिसिज़ कालापानी के कान इस कदर सुन्न पड़ गए थे मानो किसी ने कान में रस्सी बम फोड़ दिया हो।
बगल में बैठा ड्राइविंग स्कूल का ट्रेनर "घंटियाल" बड्डन को जनता तोह नहीं तोह नहीं था पर उनके ड्रेस कोड से किसी पार्टी से संभंधित होने का अनुमान लगाते हुए , बड्डन भैया से माफ़ी मांगने लगा। उसकी बिनती को देखते हुए जटा रुपी मूछों को फेरते हुए बड्डन ने मांफ किया और दुकान के लिए आगे बढे।
जंभूरि चौक स्थित बड्डन की दुकान पर उनका DJ और भंडारा आयोजन का व्यवसाय था। दुकान पहुंचने तक रास्ते भर कई मर्तबा तकिया कलाम बाहर आने को आतुर रहा लेकिन, सावन सोमवार की समाप्ति पर कावड़ियों के सैलाब के लिए और नागरिक भ्रष्टाचार मंत्री "श्री बाबू कतरी" के नगर आगमन के दौरान भंडारे और DJ की व्यवस्था के तनाव की वजह से वे खुद पर काबू किये रहे।
कुछ ही घंटों बाद ,विशाल कावंड यात्रा के कावड़िये जंभूरि चौक पहुंचे , उनकी संख्या इतनी प्रबल थी मानो, स्वयं घोंघा नदी सड़क पर उतर आयीं हो। बड्डन भैया और उनके सवा तीन दर्जन चेलों की पुरजोर तैयारी में पसंदीदा गाना "भोले तोह हो गए टनाटन" सुनते हुए और स्वल्पाहार करते हुए कावड़िये आगे अपने गंतव्य की और बढ़ लिए। बड्डन भैया का ख़ास चेला "जहर" ने बताया की कुछ लोग स्वल्पाहार की बुराई कर रहे थे , पर आपसे कुछ नहीं कहा, घमंडी हंसी का भाव लाते हुए और अपना तकिया कलाम जड़ते हुए बड्डन बोल पड़े "किसी की हिम्मत है" ???।
अचानक मोबाइल की रिंगटोन "भोला नई माने रे" बजी , और बड्डन को खबर आई की माँ की तबियत बहुत ख़राब लग रही है, शाम को मंत्री जी के आगमन की तैयारियां की चिंता सोचते हुए , बड्डन ने जहर को माँ को सुप्रसिद्ध व्यापम कांडी डॉक्टर "चूना वाला" को दिखाने के लिये भेजा और ये भी हिदायत दी की डॉक्टर को बता देना की यह "किसकी" माँ हैं।
अचानक मोबाइल की रिंगटोन "भोला नई माने रे" बजी , और बड्डन को खबर आई की माँ की तबियत बहुत ख़राब लग रही है, शाम को मंत्री जी के आगमन की तैयारियां की चिंता सोचते हुए , बड्डन ने जहर को माँ को सुप्रसिद्ध व्यापम कांडी डॉक्टर "चूना वाला" को दिखाने के लिये भेजा और ये भी हिदायत दी की डॉक्टर को बता देना की यह "किसकी" माँ हैं।
मंत्रीजी के मंच साज सज्जा की तैयारियों में जुटे बड्डन के सामने सड़क पर, किसी फिदायीन रुपी गमछा लपेटे अपनी ए वी एस "चूंटी" पर आ रही लड़की को खाज "अल्सर" पर सवार लड़के ने टक्कर मर दी थी। लड़की को बचाने पास खड़े "स्पाइडरमैन, सुपरमैन, बैटमैन और आयरन मैन" लड़के को सबक सिखाने पहुँच चुके थे, पहले कौन बचाएगा की कोलाहल में सभी सुपर हिरोज आपस में "तू जानता नहीं मैं कौन हूँ", "तू नहीं जानता की मैं कौन हूँ" की गूँज से बाजा फाड़ रहे थे।
पास खड़े तमाशा देख रहे बड्डन के कानों में अचानक , खुदका सर्वाधिकार समझने वाले तकिया कलाम की गूँज पड़ी, जिसे सुनते ही बड्डन की रगों में बह रहे आरबीसी, w बीसी और प्लेटलेट्स में उबाल आ गया जिसके फलस्वरूप "हल्क" का रूप ले चुके बड्डन और उनके चेलों ने स्पाइडर और सुपर तोह क्या किसी को मैन कहलाने लायक भी नहीं छोड़ा।
पास खड़े तमाशा देख रहे बड्डन के कानों में अचानक , खुदका सर्वाधिकार समझने वाले तकिया कलाम की गूँज पड़ी, जिसे सुनते ही बड्डन की रगों में बह रहे आरबीसी, w बीसी और प्लेटलेट्स में उबाल आ गया जिसके फलस्वरूप "हल्क" का रूप ले चुके बड्डन और उनके चेलों ने स्पाइडर और सुपर तोह क्या किसी को मैन कहलाने लायक भी नहीं छोड़ा।
.....शाम को मंत्रीजी को दूर से देखते ही बड्डन को फ्लैशबैक में याद आया की कैसे उन्होंने एक बार बीहड़ में पंचर हुई मंत्रीजी (जोकि पहले विधायक थे) की गाडी का पंचर बनाया था, जिस प्रतिभा को देख मंत्रीजी ने बड्डन को पार्टी के लड़कों से जुड़ने कहा था, और जिसके उपरांत बड्डापुर में लगे पार्टी प्रचार के बड़े बड़े हॉर्डिंग्स में मुख्य कार्यकर्ता जैसे "डोगा", "भोकाल" "पनियल" और न जाने कितनो के नीचे दबी हुई अपनी 2x2 की फ़ोटो देख बड्डन आज भी खुद को मन ही मन "विधायक" मानते हैं।
उधर जहर के फ़ोन पे फ़ोन बड्डन को अस्पताल की ओर खींच रहे, पर मंत्री जी से मिले बगैर बड्डन का वहां से निकलना संभव न था, आख़िरकार सभा समाप्ति के बाद और मंत्रीजी के बड्डन की ओर एक बार भी न देखने पर निराश बड्डन किसी धूमकेतु की गति से अस्पताल की और भागे।
रास्ते में बुलेट बंद होने की वजह से हलाकान बड्डन ,2 टन की बुलेट को घसीटते हुए, कहते रहे "चालू होजा, तू जानती नहीं मैं कौन हूँ" । थोड़ी दूर बुलेट सुधरवाने के बाद, बड्डन फिर गति पकड़ते ही हैं की अचानक सामने से आ रही महिंद्रा "बिलोरो"" से उनकी बुलेट की जबरदस्त भिड़ंत हो जाती है, बुलेट को तोह कुछ नहीं होता परंतु बिलोरो का बाँया हिस्सा पूर्णतः बिलुर जाता है, थोड़ी से चोट से और हलाकान बड्डन तकिया कलाम का बवंडर पैदा करते हुए , ड्राईवर की जोरदार पिटाई करते हुए बिलोरो को भी तहस नहस कर देते हैं। बिलोरो के अंदर बैठा दंपति बुरी तरह सहम जाता है।
उधर जहर के फ़ोन पे फ़ोन बड्डन को अस्पताल की ओर खींच रहे, पर मंत्री जी से मिले बगैर बड्डन का वहां से निकलना संभव न था, आख़िरकार सभा समाप्ति के बाद और मंत्रीजी के बड्डन की ओर एक बार भी न देखने पर निराश बड्डन किसी धूमकेतु की गति से अस्पताल की और भागे।
रास्ते में बुलेट बंद होने की वजह से हलाकान बड्डन ,2 टन की बुलेट को घसीटते हुए, कहते रहे "चालू होजा, तू जानती नहीं मैं कौन हूँ" । थोड़ी दूर बुलेट सुधरवाने के बाद, बड्डन फिर गति पकड़ते ही हैं की अचानक सामने से आ रही महिंद्रा "बिलोरो"" से उनकी बुलेट की जबरदस्त भिड़ंत हो जाती है, बुलेट को तोह कुछ नहीं होता परंतु बिलोरो का बाँया हिस्सा पूर्णतः बिलुर जाता है, थोड़ी से चोट से और हलाकान बड्डन तकिया कलाम का बवंडर पैदा करते हुए , ड्राईवर की जोरदार पिटाई करते हुए बिलोरो को भी तहस नहस कर देते हैं। बिलोरो के अंदर बैठा दंपति बुरी तरह सहम जाता है।
खुद को शांति मिलने के बाद बड्डन आगे बढ़ते हुए, हॉस्पिटल के गेट पर पहुँचते ही हैं की पीछे से "डू नॉट डायल 100" से उतरे पोलिसकुकर्मि "पस्तराम" और "घूस गैंडाम" बड्डन की कालर पकड़ते हुए , गाडी में बिठाकर उन्हें थाने में लाकर बंद कर देते हैं।
तकिया कलाम का रट्टा लगाते हुए बड्डन थाना इंचार्ज "बेताल सिंह" को अपना परिचय देते हैं की वो " कुत्तर गधानसभा क्षेत्र" की "केला खाओ" पार्टी के मेधावी कार्यकर्ता हैं। यह सब सुनकर आक्रोशित बेताल सिंह , बड्डन की जोरदार मालिश करवा देते हैं। बड्डन अपना मोबाइल फ़ोन "मतरोला" निकालते हैं, लेकिन भिड़ंत के दौरान वो भी तहस नहस हो चुका रहता है।
तकिया कलाम का रट्टा लगाते हुए बड्डन थाना इंचार्ज "बेताल सिंह" को अपना परिचय देते हैं की वो " कुत्तर गधानसभा क्षेत्र" की "केला खाओ" पार्टी के मेधावी कार्यकर्ता हैं। यह सब सुनकर आक्रोशित बेताल सिंह , बड्डन की जोरदार मालिश करवा देते हैं। बड्डन अपना मोबाइल फ़ोन "मतरोला" निकालते हैं, लेकिन भिड़ंत के दौरान वो भी तहस नहस हो चुका रहता है।
पहचान
हस्यमेव जयते (अंतिम भाग)
हस्यमेव जयते (अंतिम भाग)
,,,,,,पूरे 48 घंटो के बाद और किसी के छुड़वाने तोह दूर, मिलने भी न आने पर बड्डन की चिंताएं बढ़ जाती हैं। लाख माफियां मांगने के बाद भी बड्डन पर कोई रहम नहीं बरता जाता। अपने तकिया कलाम से मजबूर बड्डन उसे दोहराता रहता, पक चुके कानों से परेशांन पस्तराम बड्डन को बताता है की
"तू कौन है ये तोह मुझे नहीं मालूम , पर तू नहीं जानता की तूने किसकी गाड़ी क्षतिग्रस्त की है , सवालिया निशान लिए बड्डन पूछता है किसकी ? पस्तराम उसे बताता है की वो बड्डापुर के "कमिश्नर" श्री "प्रदीप खेडेकर" की गाडी थी। और तुझे अब ब्रम्हा भी नहीं बचा सकते । बड्डन की साँसे हलक में रुक जाती है।
आख़िरकार पाँचवे दिन पस्तराम लॉकर का दरवाजा खोलता है और बड्डन को बाहर आने कहता है , सीना ताने बड्डन तकिया कलाम जड़ता ही है की पस्तराम उसे बताता है की तुम्हे कोई छोड़ा वोडा नहीं जा रहा , तुम्हारी माँ का देहांत हो गया और 3 घंटे के लिए अंत्येष्टि के लिये ले जाया जा रहा है।
घाट पहुँचते ही माँ के पार्थिव और अग्नमग्न शारीर से उठती लपटें , बड्डन को पहली बार उसकी असली """""पहचान"""" बता रहीं थीं।
जिसे महसूस कर बड्डन को एहसास हुआ की "वह कौन है"।
जिसे महसूस कर बड्डन को एहसास हुआ की "वह कौन है"।
विकास पाण्डेय (२०/०८/२०१६, ०३.२९)
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