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Tuesday, August 2, 2016

gizmo freak; गिज़मो फ्रीक


रोहन, शहर के जाने माने, प्रतिश्ठित, समृद्ध और शक्तिशाली उद्योगपति कपूर साहब की शहर के ही टॉप के इंग्लिश मीडियम स्कूल की बारवीं कक्षा में पढ़ने वाली एकलौती संतान थी।
लाजमी था, बचपन से ही रोहन सारे सुख, भौतिक संसाधनों और सुविधाओं के बीच पैदा और पला बढ़ा था।
कष्ट, दुःख, तकलीफें,परेशानियां और समस्याएं किसको कहते हैं, रोहन जानता ही नहीं था।
देर रात तक अपने 40 X 40 के आलीशान बैडरूम में बेड के सामने लगे 90 इंच के sony एल.ईडी में पसंदीदा इंग्लिश मूवीज देखे बिना रोहन को नींद नहीं आती थी।
सुबह रोहन के उठने से पहले,दाताराम जूस का गिलास लिए तैनात रहते थे, जूस ख़त्म करते ही jaguar की एक्सेसरीयो से लैस बाथरूम में लगे वाय-,फाय संचालित स्पीकरों में गाने सुनते हुए नहाकर रोहन बाहर आते ही भोला द्वारा हाँथ में पकड़ी हुई स्कूल ड्रेस पहनता था। साथ ही साथ उसका एप्पल 6 एस प्लस फ़ोन ,ब्लूटूथ से कनेक्टेड स्पीकरों पर सोशल मीडिया के अपडेट'स उसे सुनाते थे।
शुद्ध शाकाहारी भोजन से वंचित रोहन फ्रेंच फ्राइज का नाश्ता करने के बाद अपनी मर्सडीज़ x1 में बैठकर स्कूल चला जाता।
स्कूल के लंच ब्रेक में जब क्लासमेट्स जल्द टिफिन ख़त्म करके ग्राउंड में खेलने दौड़ पड़ते, तब रोहन छुपा के लाया हुआ, अपने sony PSP पर गेम्स खेलता रहता।
स्कूल के टीचरों द्वारा असाइनमेंट, प्रैक्टिकल नोटबुक, यूनिट टेस्ट, हाफ इयरली वगेरह में शून्य बटा सन्नाटा की स्थिति में पड़ती हुई डाटों को कनबहरी करने की अद्भुत कला को रोहन ने अपने अंदर जबरदस्त रूप से विकसित कर लिया था।
एग्जाम की कॉपियां भले ही जीरो से सुस्सजित हो,पर "कैंडी क्रश सागा" के सारे लेवल पार करने में रोहन को महारथ हासिल थी , स्कूल के समस्त टीचर्स रोहन को "टॉकिंग टॉम", प्रतीत होते थे। उनके कार्टून सैमसंग गैलेक्सी नोट 2 पर बना बना रोहन सोशल मीडिया पर पोस्ट करता रहता ।
परीक्षाओं की घडी जब-जब आती तब-तब रोहन की उँगलियों और सर में भयंकर दर्द होता, क्योंकि लिखने की तुलना में वो अपने आप को मोबाइल और लैपटॉप में टाइपिंग करने में ज्यादा कम्फ़र्टेबल महसूस करता।
उद्योग की असीम व्यस्तता में लीन कपूर साहब और किटी पार्टियों से जब कभी फुरसत मिलती ,तब कभी कभार रोहन को मम्मी पापा के और उनको रोहन के दर्शन होते थे। इस औपचरिक्ता की रोहन को कभी जरुरत महसूस नहीं होती थी, क्योंकि वो अपने कुछ बहुत पक्के दोस्तों के साथ हमेशा मशगूल रहता था।
यह दोस्त उसका साथ कभी नहीं छोड़ते थे , वे थे फेसबुक, वॉट्सएप्प, ट्विटर, लाइन और वाइबर।
कॉलोनी के दोस्त जब रोहन को क्रिकेट खेलने के आवाज देते, तब पिछले साल हिम्मत करके क्रिकेट का एक गेम खेलते वक़्त फूली हुई सांस को याद करके , रोहन उन्हें मना कर देता और यह कहकर की मुझे अभी GTA san Andreas का बारवां लेवल पार करना है।
बारवीं की कॉमर्स संकाय की मार्कशीट पर 47% का आंकड़ा लेकर और वेइइंग मशीन पर वजन का 102 किलो का आकड़ा लेकर वक़्त रोहन उसकी बढ़ती हुई गैजेट्स की सूची के साथ घसीटते हुआ आगे ले जा रहा था।
टेक्नोलॉजी के इस युग में ऐसी कोई गैजेट नहीं थी जो इसी युग में पले बढे रोहन के पास न थी। उनसे थोड़ी देर की भी दूरी रोहन बर्दाश्त नहीं कर सकता था।
शहर के ही बेस्ट आर्ट्स और कॉमर्स कॉलेज में प्रवेश की औपचारिकताएं अपने मैनेजर से ख़त्म करवाके , कपूर साब अपने बेटे रोहन को चीन की राजधानी शेंघाई कुछ दिनों के लिए व्यापार के गुण सिखाने ले गए। शेंघाई न सिर्फ चीन बल्कि पूरी दुनिया में गैजेट्स की राजधानी के नाम से प्रसिद्ध थी ।
इसी प्रसिद्धि का पूरा लाभ लेते हुए रोहन व्यापार को फालतू समझते हुए, और ढेर सारे गडेट्स लेकर अपने शहर वापस लौट आया।
चीन की यात्रा में बिज़नेस से समन्धित एक टेंडर पास होने की ख़ुशी में कपूर साब ने अपने बंगले में एक शानदार पार्टी दी, रोहन को मजबूरन सबसे स्मार्टफोन की ओर देखते हए मिलना पड़ रहा था। ...........थोड़ी दूर से दोस्त की आवाज ने रोहन का ध्यान खींचा।
सबसे मिलते हुए , कोल्ड ड्रिंक्स पे कोल्ड ड्रिंक्स पीते हुए रोहन का वक़्त बीत रहा था,,,,,,,मिसिज़ कपूर के फ्रेंड्स के आग्रह करने पर उन्होंने रोहन को उनसे मिलवाने के लिए मिसिज़ कपूर ने अपने नौकर को रोहन को बुलाने के लिए कहा।
कुछ ही मिन्टो में ना आने पर और पास ही लगी भीड़ की ओर नजर पड़ते ही मिसिज़ कपूर और उनके फ़्रैंडस ने दौड़ लगाई । भीड़ को हटाने के बाद ,रोहन को जमीन पर पड़े देकब देख उनकी हालत ख़राब हो गयी।
रोहन को एकाएक जबरदस्त चक्कर आने की वजह से सिर और कंधो पर गंभी चोटें आई थी ।
पास ही खड़े गंभीर रूप से घबराये हुए कपूर साब ने पार्टी मैं आये हुए अपने दोस्त और शहर के जाने मने एम्.डी इन मेडिसिन के डॉक्टर राजन द्वारा चेक अप करवाया।
डॉ राजन ने रोहन की फ़ौरन अस्पताल ले जाकर तमाम टेस्ट करवाये। जिनकी रेपिर्ट्स ने अगली सुबह कपूर साब के होश उड़ा दिए। रोहन की ज़िन्दगी के रिपोर्ट कार्ड में इतने बड़े आकंड़े उनके सामने थे।
महज 18 साल की उम्र में रोहन के टेस्ट्स की रिपोर्ट्स में रीडिंग्स के कांटे मीटर फाड़ फाड़कर बहार आ रहे।
सब चिंताजनक फिगर 485 का था जो रोहन की ब्लड शुगर का था।
मेडिकल रिपोर्ट्स खींच खींचकर अपने बेटे रोहन के प्रति लापरवाही बरतने पर मिस्टर और मिसिज़ कपूर पर झन्नाटेदार झापड़ रसीद कर रही थी।
कपूर साब से गहरी मित्रता और रोहन की जीवनशैली से शुरू से ही वाकिफ डॉ राजन ने कमर कस्ते हुए उन्हें सुझाव दिया की , इससे पहले रोहन की मेडिकल कंडीशन्स और गंभीर रूप ले, उसे सबसे पहले उसकी वर्तमान दिनचर्या और उसी में समाये हुए सबसे घातक शत्रु गैजेट्स और जंक फ़ूड से अलग करना होगा।
अस्पताल में बने इंटेंसिव केअर यूनिट की तरह "किसी भी धुन,लत या नशे से मुक्ति दिलाने के लिए रोहन को देहरादून स्थित स्पेशल रिहैबिलिटेशन सेंटर में कुछ समय के लिए स्थानातरित करने का सुझाव डॉ राजन ने कपूर साब को दिया।
इस कठिन सुझाव के प्रति कपूर साब के सहयोग और रोहन के लाख इंकार के बावजूद उसे सेंटर शिफ्ट कर दिया गया।
वास्तविक दुनिया से पूर्णतः वंचित और वर्चुअल दुनिया में जीने वाले रोहन को सेंटर पहुँचते ही न तो मम्मी पापा और न किसी दोस्त की याद आ रही थी, क्यूंकि उसका परिवार और पूरी दुनिया उसके गैजेट्स थे,जिनकी अनुपस्थिति की तड़पन रोहन उर पूरे सेंटर को हलाकान कर रही थी।
पूरे 2 दिनोपरांत रोहन का चिड़चिड़ापन पूरे परवान पर था, क्यूंकि 2 दिनों से उसे सेंटर, वास्तविक जिंदगी की हकीकतों और उन क्रियाओं से अवगत करा रहा था जो रोहन ने पहले कभी नहीं देखि थी।
सेंटर की सख्त शैली में शामिल क्रियाएँ ,जैसे प्रातः 4 बजे उठाकर 2 घंटे का योग, फिर 2 किमी की चलयात्रा, साफ़ स्वच्छ एवं शाकाहारी भोजन ,फल, और क्रिएटिव एक्टिविटी जैसे पेंटिंग, पोट्टेरि, घुड़सवारी, गार्डनिंग, खेलकूद, वर्जिस इत्यादि और किसी भी प्रकार के नुकसानदायक भौतिक संसाधन का पूर्ण वर्जिकरण, रोहन की आत्मा कंपा रहे थे।
कुछ दिनों के बाद रोहन का हेल्थ स्टेटस लेने पहुंचे डॉ राजन के माथे से ac में तब पसीन निकलना शुरू हुआ ,जब उन्होंने देखा की रोहन की हालत सुधरने के बजाय और बिगड़ती जा रही है, देश के बेहतरीन डॉक्टरों के ट्रीटमेंट 
और सेंटर की शानदार केअर के बाद भी रोहन में फिजिकल से कहीं ज्यादा मेन्टल/न्यूरोलॉजिकल,,, डिस्टर्बेंस/डिसऑर्डर आ रहे हैं।
रोहन से मिलने की चेष्टा के बाद जब डॉ राजन रोहन के सामने पहुंचे तोह इन्हें देख , रोहन उनके पाँव पकड़ते हुए, गिड़गिड़ाते हुए अपने गैजेट्स की मान्ग करता रहा। सब कुछ मन होने पर सिर्फ एक बार के लिए रोहन ने अपने स्मार्टफोन की मान्ग की। 
रिश्ते में न सही ,पर अपने बेटे जैसे रोहन की हालत डॉ राजन से देखि नहीं जा रही थी,इसलिये सेंटर के सख्त नियम और कपूर साब की शख्सियत के बल पर , पहली बार सेंटर के पेशेंट सेक्शन में अच्छी तरह पैक करवा कर केवल 10 मिन्टो के लिए किसी स्मार्टफोन को लाया गया था।
स्मार्टफोन के साथ आये मिस्टर और मिसिज़ कपूर वन साइडेड कांचं से अपने बेटे को देख रहे थे।
अपने फ़ोन को हांथों में देख रोहन के आंसूं रुक नहीं रहे थे। कुछ देर इस्तेमाल करने में बाद रोहन ने चैन की सांस लेते हुए अपना फ़ोन वापस कर दिया। और अपने दुर्बल पड़ चुके शारीर और हौसले को लिए रोहन चुपचाप अपने कमरे में लौट गया।
डॉ राजन मीटिंग के सिलसिले में सेंटर के पास स्थित गेस्ट हाउस में रुके रहे, मिस्टर कपूर ने बिज़नेस के सिलसिले में सिंगापुर की फ्लाइट पकड़ी और मिसिज़ कपूर भी शहर लौट गयीं।
उसी रात के ठीक तीन बजे फ़ोन की घंटी और फ़ोन में मिले मेसेज सुनने के बाद ,डॉ राजन बिजली से भी तेज गति से सेंटर की ओर भागे, रोहन को डॉक्टरों से घिरा हुआ देख और उनके कमेंटस ने डॉ राजन के होश उड़ा दिए।
रोहन ने कॉमन टॉयलेट रूम में रखी एसिड की पूरी पौन लीटर की बोतल पी ली थी। और स्पेशलिस्टस के मुताबिक सीवियर डायबिटिक और मेडिकल कंडीशन्स के चलते रोहन को बचाना नामुमकिन था।
थोड़ी देर में हुआ भी वही, रोहन तड़पते हुए अपने प्राण त्याग चुका था। हलक में अटकी हुई सांस लेकर डॉ राजन सिर्फ एक ही बात सोच रहे थे की इस खबर का सामना वो कपूर साब से कैसे कराएंगे?
अगली सुबह खबर मिलते ही मिस्टर और मिसिज़ कपूर का शारीर, सोच और साँसे सुन्न पड़ चुकी थी ।अपने हज़ारों करोडों के कारोबार को भविष्य में सँभालने वाली एकलौती संतान को खोने का दर्द उनके लिए असहनीय था।
गतिवान वक़्त किसी के लिए नहीं रुकता, उसके बीतते तेरह दिनोपरांत , कपूर साब रोहन के रूम में लगी उसकी तस्वीर को निहारते हुए यह सोच रहे थे जिस आत्मीयता और पालन पोषण की रोहन को जरुरत थी , उससे वंचित रखकर उन्होंने कितना बड़ा पाप किया है।
इतने में ही सेंटर द्वारा लौटाया हुआ रोहन का फ़ोन कपूर साब द्वारा ऑन करते ही नोटिफिक्शन्स से बज उठा। फेसबुक ओपन करते ही कपूर साब ने देखा ,रोहन ने सेंटर से अपनी आखिरी सेल्फी पोस्ट की थी । साथ में लिखा था
"" फीलिंग बोर विथ दिस लाइफ, अपना ख्याल रखना मेरी गैजेट्स ,टाटा""।
मेसेज को देखने के बाद,कपूर साब गैजेट्स से सजे हुए रूम को देखकर नम आँखों से एक ही बात सोच रहे थे की, उन्होंने रोहन को इंसान बनाने की बजाए महज एक चलता फिरता "गिज़मो फ्रीक" बना दिया था।
गिज़मो फ्रीक

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