राघव, cbse स्कूल की दसवीं कक्षा में पढ़ने वाला एक बेहद, अत्यंत ,,,,,अंतर्मुखी छात्र था।
उसके अन्तर्मुखीपन की वजह , अच्छी मंशा से दी हुई बचपन की एक सीख को गलत ढंग से आत्मसात करना थी।
उसके अन्तर्मुखीपन की वजह , अच्छी मंशा से दी हुई बचपन की एक सीख को गलत ढंग से आत्मसात करना थी।
सीख थी" बुरे वक़्त में काम आने वाले ही अच्छे और सच्चे मित्र होते हैं",,,,,,,,बाकी सुनहरे वक़्त में तोह सब मौज उड़ाते है।
इस वाक्यांश ने राघव पर इतना गहरा असर किया था की वो हर मिलने वाले शक्श को स्वार्थ और मतलब के दृश्टिकोण से ही देखता था, हार बार वह सिर्फ और सिर्फ यह सुनिश्ति करने के गुंताड़े में रहता की कौन मेरे कितने काम आ रहा है।
उसकी इस सोच की कसौटी पर केवल दो ही लोग खरे उतरे थे, सिद्धार्थ और गरिमा, राघव के साथ बचपन से स्कूल में पढ़ने वाले, ये दोनों राघव की शुरू से ही मदद करते आ रहे थे, और सोच के मुताबिक राघव को चेक करने से फुरसत ही कहाँ थी की वो इनकी मदद करे।
फ्रेंडशिप डे का दिन था, हज़ारों की भीड़ से बने अपने मात्र दो दोस्तों के लिए राघव ने फ़्रेंडशिप बैंड खरीद लिए थे।
पहले, सिद्धार्थ और गरिमा मुझे विश करेंगे ,फिर मैं करूँगा, इस सोच के साथ राघव की सुबह से शाम हो गयी , हज़ारों बार मोबाइल चेक करने वाले राघव को वो दो मेसेज नहीं मिले जिसका उसे बेसब्री से इंतज़ार था।
हर एक पल पर सामने से मिलने वाले रिस्पांस को तौलने वाले राघव का ख़रीदे हुए फ्रेंडशिप बैंड्स को देख देख कर खून खौल रहा था।
गुस्से से तिलमिलाए राघव ने सिद्धार्थ और गरिमा को मन ही मन मतलबी और स्वार्थी घोषित करते हुए , दुश्मन जैसा मान लिया था।
गुस्से से तिलमिलाए राघव ने सिद्धार्थ और गरिमा को मन ही मन मतलबी और स्वार्थी घोषित करते हुए , दुश्मन जैसा मान लिया था।
शाम से रात होने को आई ,राघव के मोबाइल का इनबॉक् खाली का खाली ही रहा, फ़्रेंडशिप डे की समाप्ति को केवल 10 मिनट ही बाकी थे, राघव ने दोस्ती तोड़ने के उद्देश्य से सिद्धार्थ को फ़ोन किया, मोबाइल बंद मिला! घर पर कई घंटियों के बाद सिद्धार्थ के घर के नौकर ने फ़ोन उठाया और जो कुछ बताया उससे राघव की नींद और चैन सब उड़ गया।
कोचिंग से लौटते वक़्त , साइकिल पर सवार सिद्धार्थ को सामने से आती कार की जबरदस्त टक्कर से गंभीर चोटें आयीं थी , और वह हॉस्पिटल के icu में भर्ती था। नौकर ने ये भी बताया की,,,,,
सिद्धार्थ को देखने जा रही गरिमा को रास्ते में मिले फ़ोन में यह खबर मिली की उसकी मम्मी को हार्ट अटैक आ गया है, उलटे पावँ भागी गरिमा के पापा मम्मी को हॉस्पिटल ले जा रहे हैं, इत्तेफ़ाकन गरिमा की मम्मी भी उसी हॉस्पिटल में एडमिट थीं, जिसमे सिद्धार्थ भर्ती था।
सिद्धार्थ को देखने जा रही गरिमा को रास्ते में मिले फ़ोन में यह खबर मिली की उसकी मम्मी को हार्ट अटैक आ गया है, उलटे पावँ भागी गरिमा के पापा मम्मी को हॉस्पिटल ले जा रहे हैं, इत्तेफ़ाकन गरिमा की मम्मी भी उसी हॉस्पिटल में एडमिट थीं, जिसमे सिद्धार्थ भर्ती था।
पूरी रात खुद को कोसता हुआ राघव अगली सुबह का सूरज निकलते ही ,हॉस्पिटल को ओर भागा। कांच के बाहर से सिद्धार्थ को झांकते हुए राघव अपने न रुकने वाले आसुओं को पोंछ ने की कोशिश कर रहा था।
थोड़ी देर के लिए मिलने आई गरिमा भी सिद्धार्थ के पास ही बैठी थी।
थोड़ी देर के लिए मिलने आई गरिमा भी सिद्धार्थ के पास ही बैठी थी।
बहुत हिम्मत करके राघव ,सिद्धार्थ के नजदीक पहुंचा उसका हाँथ पकड़कर और रोती हुई गरिमा को देखते हुए ,निशब्द राघव बस यही सोच रहा था की ,इनके बुरे वक़्त में इनके साथ न रहकर उसने अपनी दोस्ती का अपमान किया है।
कुछ देर बाद , गरिमा का ढांढस बंधाते हुए ,राघव ने अपनी जेब से फ़्रेंडशिप बैंड निकाला और दोनों को बांधते हुए , मन ही मन यह सौगंध ली की अब सारी जिंदगी वह दूसरों की मदद के रूप में सामने आएगा।
इस सौगंध के साथ राघव चुपचाप अपने घर लौट गया, अपने रूम में पहुंचते ही उसने अपनी डायरी जला दी जिसमे उसने स्वार्थ रुपी हुए कामों की व्याख्या की थी।
नई डॉयरी के उद्घाटन के रूप में उसने पहले पन्ने पर पहले शब्द लिखे,,,,जो थे,,,,,,"अ फ्रेंडशिप डे".
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