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Saturday, August 6, 2016

global war(n)ing; ग्लोबल वॉर(निं)ग


सन् 2020,
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के भनपुरी इलाके की सत्यम कॉलोनी में स्थित अपने घर में 65 वर्षीय रामानंद शर्माजी की जून माह की झुलसाने वाली गर्मी में रात में अचानक 2 बजे नींद टूट गयी।
पसीने से लत पथ शर्माजी गमछा उठाये इस आस में की बहार थोड़ी राहत मिलेगी, कॉलोनी के बीचों बीच स्थित भगवान शंकर के मंदिर के चबूतरे में जाकर बैठ गए।
यहाँ वहां नजर घुमाने पर देखा तोह कॉलोनी वासी एयर कंडीशनर की हवा बंद होने पर जल बिन मछली की तरह तड़पते हुए ,चीख पुकार कर रहे हैं। छोटे छोटे बच्चे जो ac में ही पैदा हुए थे, टमाटर की तरह लाल हो रहे हैं। अपने प्रभु से बिजली वापस लाने की प्रार्थना में शर्माजी लीन होने के प्रयास में भयंकर गर्मी की वजह स विफल रहे।
थोड़ी देर तक राहत न मिलने पर कॉलोनी के बाहर, बिलासपुर हाईवे से सटे फूटपाथ पर चलते हुए 1 किमी की दूरी पर शर्माजी बंजारी माता के मंदिर पहुंचे। सोचा यहां थोडा खुलापन है, यहाँ शायद पसीना बहना बंद हो!
,,,,,,,लेकिन जून माह की गर्मी और भनपुरी के समीप छत्तीसगढ़ इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन के उरला इलाके में स्थित सैकड़ों स्टील की कंपनियों से निकलने वाली तपन की जुगलबंदी ने 90 किलो के शर्माजी के बदन से पसीने के नल चालू रखे।
आख़िरकार थक हारकर, कुम्भकर्णीय मुहूर्त्त में शर्माजी की अपने घर के बरामदे में जैसे तैसे आँख लगी।
कुछ ही देर में, सूर्यदेव घर के अंदर घुसते हुए और शर्माजी की बनियान खींचते हुए गुड मॉर्निंग करने पहुँच गए।
बंद आँखें लिए, नहा धोकर पूजा अर्चना करके ,शर्माजी पेपर पढ़ने बैठे ही थे, की घर के बाहर खड़े कॉलोनी के पुरुषवर्ग की आवाजें शर्माजी को बाहर खींच लायीं।
सोसाइटी के वरिष्ठ अध्यक्ष होने के नाते, पूरा जमघट और बिजली न आने का आक्रोश लेकर शर्माजी पास ही के इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के ऑफिस पहुंचे।
53 डिग्री के पारे ने कॉलोनीवासियों को पूरा राशन पानी लेकर बोर्ड के सब इंजीनियर पर चढ़ने पर मजबूर कर दिया।
बिजली ऑफिस की टीम द्वारा कॉलोनी के जर्जर पड़े ट्रांसफार्मर की मरम्मत करते ही ,कॉलोनी कूलर और ac के कंप्रेस्सरों की आवाज से गूँज उठी। यह मधुर आवाज सुनते ही राहत की अनुभूति हेतु सभी अपने गंतव्य की ओर बंदरों की तरह लपके।
कुछ देर उपरांत , शर्माजी को कैलाश मानसरोवर की यात्रा कराती कूलर की शीतल हवा अचानक रुक गयी!!
थोड़ी देर ही मैं क्रिकेट मैच के रीप्ले की तरह शर्माजी और सब इंजीनयर , सुबह की तरह फिर ट्रांसफार्मर को सुधारते हुए कर्मचारियों को तक रहे थे।
सुबह के आक्रोश का खेद जताते हुए, शर्माजी ने सब इंजीनियर को समझाने की कोशिश की ही थी की , चश्मा उतारकर आँखों में चुन चुनाते हुए पसीने को पोंछकर जब सब इंजीनियर ने तकनिकी समस्या के आंकड़े जैसे ही बताये, शर्माजी का ट्रांसफार्मर उड़ गया।
इंजीनियर ने बताया, आपकी कॉलोनी में कुल 84 घर हैं,
तीनसौ अस्सी टन की भार क्षमता वाला यह मासूम ट्रांसफॉर्मर आप लोगों का भार पिछले 35 सालों से उठा रहा है।
आज से महज 7 साल पहले ,जहाँ आपकी कॉलोनी में मात्र 11 ac लगे थे ,वही आज बढ़कर 77 हो गए हैं । इस लिहाज से जैसे ही पारा बढ़ते सब ac चालू करते हैं , इसकी सांस उखड जाती।
अब आप यह कहेंगे की एक ट्रांसफार्मर और लगवा दो, तोह यह देखिये उसके मेरे द्वारा दिए हुए आवेदन, पर आप लोगों ने ही नगर निगम से नक्शा पास करा करा कर ,जो मकान पे मकान धोंके हैं उसके बाद, कोई जगह ही कहाँ छोड़ी है दूसरे ट्रांसफॉर्मर लगने की !!!!!,
हर नया ac कॉलोनी में घुसते ही , इस बिचारे को शोषण की नजर से चिढ़ाता हुआ निकल जाता, और ये बेचारा दर के मारे उड़ जाता है।
~~~अब आप ही बताइये , दूसरा ट्रांसफार्मर कहाँ लगा दूं, !!!आपके सिर पर??????????.
निशब्द और स्तब्ध शर्माजी, विचारों के टोकरी अपने सर पर रखे चुपचाप अपने घर हो लिए, घर पर उनकी धर्मपत्नी कौशल्या चाय लाकर पास बैठीं।
और इतना ही कहा की आज अगर मेरे ,ब्रम्हा, विष्णु और महेश होते तोह यह समस्याएं कभी न आती।
एन्विरोमेंटल साइंस में पीएचडी , कौशल्या ने घर गृहस्थी की जिम्मेदारियों को मद्देनजर रखते हुए 25 साल पहले अपनी नौकरी त्यागी थी। गृहस्थ जीवन में महारथ और काम में बेहद कुशल कौशल्या ने अपने ज़िन्दगी के तजुर्बे से शर्माजी के आँगन को अपनी मेहनत से संवारा था।
38 साल पहले ब्याह होकर आयीं और प्रकर्ति के प्रति असीम लगाव रखने वाली कौशल्या , सत्यम कॉलोनी के इर्द गिर्द लगे हजारों पेड़ पौधों को अपने बच्चों जैसा मानती और उनकी पूजा अर्चना करती आ रहीं थीं। उनमे से तीन वृक्ष कौशल्या और कॉलोनी की सभी महिलाओं के लिए वरदान रुपी प्रतीत होते, वे थे नीम , पीपल और बट। इन् तीनो का ही नाम कौशल्या ने ब्रम्हा, विष्णु और महेश रखा था।
वर्तमान में, बीतते समय के साथ बढ़ते पारे और बिजली की आंखमिचौली लोगों को हताहत करती रही, सितम्बर शुरू होने को आया और बारिश का नामोनिशान न था।
हलाकान गर्मी और बिजली की समस्या शर्माजी के दो पुत्रों, उनकी पत्नियां और नाती पोतों पर इस कदर प्रहार करती रही की घर का खुशहाल वातावरण भी खराब होने लगा था।
बारिश के लिए शर्माजी ने कॉलोनी में स्थित मंदिर में , भव्य यज्ञ का आयोजन कराया, दिन रात की प्रकांड पूजा पाठ के बावजूद गर्मी के तेवर कम न हुए।
21 दिनों के उपवास के बाद जब बारिश न आई तोह बदहाल शर्माजी भगवान शंकर के चरणों में गिरकर दया की भीख मांगने लगे। बोलने लगे, कहाँ हो प्रभु ? प्रकट हो, रहम करो!
इतने मे शर्माजी के कानो में पड़ती हुई एक दिव्या आवाज ने कहा,,"मैं यहीं था ,साक्षात् जीता जागता, हराभरा लहलहाता हुआ, पर तुम लोगों से देखा नहीं गया, काट कर फेंक दिया मुझे। ये मौसम मेरी सिर्फ चेतावनी है, अभी तोह मेरा कहर बाकी है।
शर्माजी को एहसास हुआ, कुछ सालों पहले कंस्ट्रक्शन के चलते उन्होंने सत्यम कॉलोनी के इर्द गिर्द लगे सभी पेड़ कटवा दिए थे। जिसमे कौशल्या के लिए ईश्वर रुपी पीपल, नीम और कॉलोनी के बीचों बीच लगा बट का पेड़ भी शामिल था, जिसे कटवाकर शर्माजी और कॉलोनी के लोगो ने भगवान शंकर का मंदिर निर्माण करवाया था।
शर्माजी और कॉलोनी के समस्त लोगो के रग रग में बहती हुई गर्मी ,प्रकर्ति पर हुए अत्याचारों के बदले में मिल रही ~~~~~~~~ग्लोबल वॉर(नि)ग~~~~~~~~~~~
का पल पल एहसास करा रही थी।

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