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Thursday, July 28, 2016

selfie; सेल्फी

नीरा जबलपुर के एक मध्यमवर्गीय परिवार में अपने मम्मी पापा की लाड़ली छोटी बेटी थी, या यूँ कहें अपने पापा का बेटा थी।
देखने , हाव-भाव में तेज तर्राट और पढाई में बेहद होशियार नीरा , धूमकेतु की गति से बढ़ने वाले भौतिक संसाधनों से लैस के दौर से गुजर रही थी।

लेकिन इस दौर के सबसे प्रभावशाली शस्त्र "स्मार्टफोन" से वो अभी तक वंचित थी।
मम्मी पापा के सपने पूरे करने और मानसिक रूप से विक्षिप्त बड़ी बहन के इलाज के खातिर ,नीरा अपने सपनो को अपने अंदर ही रखते हुए आगे बढ़ रही थी।

फिर एक रोज़ एम. कॉम के फर्स्ट इयर में टॉप करने की ख़ुशी में उसने अपने पापा से स्मार्टफोन तोहफे के रूप में आख़िरकार पा लिया।
नीरा की ख़ुशी का कोई परवान ना था।
मिन्टो में वाट्स एप और फेसबुक डाउनलोड कर ,अपनी सहेलियों और दोस्तों की तरह नीरा ने अपनी पहली "सेल्फी" पोस्ट की।
पोस्ट पर लाइक्स की भरमार ने नीरा को सेल्फी के नशे से सराबोर कर दिया।
वक़्त गुजरता गया और नीरा की सेल्फ़ियों का आंकड़ा एक दिन में 200 पार करने लगा।
पोस्ट ग्रेजुएशन के फाइनल इयर में सेकंड डिवीज़न लेकर, नीरा ने अपनी सहेलियों की कैरियर के प्रति सजगता को देखते हुए बड़े शहर में नौकरी करने का फैसला लिया।
सबकी उम्मीदों को संजोते हुए, मम्मी पापा और जबलपुर से विदा लेते हुए नीरा मुम्बई के "छत्रपति शिवजी टर्मिनस" पर ट्रेन से उतरी।
टर्मिनस के साथ सेल्फी लेते हुए , नीरा ने अच्छी नौकरी पाने का खुद से वादा किया और लोकल ट्रेन के फर्स्ट क्लास डब्बे की टिकट लेकर नवी मुम्बई में स्थित घंसोलि इलाके में अपनी सीनियर के रूम पहुंची।
कुछ दिनों तक मुम्बई की स्काई स्क्रैपर कहलाने वाली गगनचुम्बी इमारतों के साथ नीरा की सेल्फ़ियों का सिलसिला फेसबुक पर लाइक्स की बाढ़ लाता रहा।
साथ ही साथ रोजाना 10 कंसल्टेंसीयों में जॉब के लिए इंटरव्यू देने का सिलसिला भी चलता रहा।
तकनिकी शिक्षा के ज़माने में सेकंड डिवीजन का एम कॉम और मुम्बई जैसे शहर में रहने का खर्चा, नीरा की जॉब के प्रति चिंता, जरूरतें और समस्याएं तीनो ही गंभीर रूप से खड़ी कर रहा था।
कभी सैड कभी हैप्पी मूड्स की सेल्फियां भी नियमित रूप से पोस्ट होती रहीं।
आखिरकार चार महीनो की कड़ी मेहनत के बाद नीरा को अँधेरी (वेस्ट) में स्थित एक मर्चंडीज़री कंपनी के टेली कालिंग विभाग के लिए , 27 तारिक को दुसरे इंटरव्यू राउंड को पार करते हुए , तीसरे और आखिरी इंटरव्यू राउंड में प्रवेश करने का मौका मिला। 
उस पद के लिए आये हुए सभी उमीदवारों में से नीरा और उसी के जैसी होनहार, महेनती और प्रभावशाली कैंडिडेट पल्लवी नायडू को फाइनल इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था।
अब कैंडिडेट 2 और पद एक ही था। नीरा को अपने ऊपर पूरा आत्मविश्वास था।
चैन की सांस लेते हुए नीरा ने लाइट मूड सेल्फी पोस्ट की ।
तीसरा और फाइनल राउंड नीरा की नौकरी के आयाम तय करने वाला था।
ऐरोली से वाशी स्टेशन पर लोकल ट्रेन बदलते हुए, नीरा को 29 तारिक की सुबह ठीक 11 बजे अँधेरी पहुंचना था।
29 तारिक की सुबह ,नीरा के मन में गहन चिंतन और असमंजसता से भरा उल्लास लेकर आ गयी।
समय सीमा को ध्यान में रखते हुए , और अपनी सबसे कीमती चीज़ "पूर्णतः चार्ज किया हुआ स्मार्टफोन" को संभालकर रखते हुए, नीरा,,,,,,,,,,,,,,,,,
ऐरोली स्टेशन से लोकल ट्रेन पकड़कर पूरे आत्मविश्वास के साथ वाशी स्टेशन के प्लेटफार्म क्रमांक 2 पर पहुंची।
अगली लोकल का इंतज़ार करते हुए ,नीरा फेसबुक के लाइक्स चेक करने लगी।
इसी बीच , सामने ही प्लेटफार्म क्रमांक 4 पर चल रही एक सुप्रसिद्ध धारावाहिक की शूटिंग पर कलाकारों को देख नीरा का उत्साह अपने पूरे परवान पर आ गया।
सोशल मीडिया पर फेमस होने के इंटरनेट पर उपलब्ध तमाम नुस्खों में से एक "किसी सेलिब्रिटी के साथ सेल्फी" के नुस्खे ने नीरा के कदम अपने आप प्लेटफार्म क्रमांक 4 की ओर तेजी से बढ़ा दिए।
मेरी लोकल आने में अभी 10 मिनट का समय है, मैं झट से सेल्फी लेकर आ जाउंगी, कहते हुए नीरा अपने सबसे पसंदीदा कलाकार के पास पहुँच कर सेल्फी लेने में कामयाब हुई, और फौरन पोस्ट भी कर दिया।
वापस तेजी से लौटते वक़्त सबवे में दूसरी लोकल की भीड़ ने नीरा को अपनी लोकल पकड़ने से रोक दिया।
इसी बीच, कुछ ही मिन्टो में लाइक्स के सुनामी आ गयी, इस ख़ुशी की खुमारी में नीरा यह भूल गयी की अगली लोकल "धीमी गति कहलाने वाली लोकल थी" जो हर स्टेशन पर रुकते हुए जाएगी।
लाइक्स को देखते हुए लोकल का सफ़र ख़त्म हुआ और नीरा अपनी कंपनी पहुँचने में पूरे 45 मिनट लेट हो गयी।
टाइम बम की तरह चलते हुए घडी के कांटे ,नीरा की चिंता बढ़ा रहे थे, अंदर पहुँचने पर नीरा ने , पल्लवी नायडू को एक फॉर्म भरते हुए बैठे देखा।
नीरा ने यह सोचकर की इंटरव्यू अभी शुरू नहीं हुआ है, थोड़ी राहत की सांस ली और पल्लवी से पुछा कैसी हो ?, उसने उत्तर दिया सर ने तुम्हे अंदर बुलाया है।
कुछ देर बाद जब नीरा बाहर आई तोह उसकी पूरी मेहनत, उमीदें और सपने ,लाइक्स की सुनामी के साथ बह गए।
सुन्न पड़े हुए शरीर को लेकर नीरा एक कुर्सी पर बैठे हुए खिड़की के बाहर लोकल स्टेशन देख रही थी।
" फाइनल इंटरव्यू और कंपनी की टाइमिंग पालिसी की मर्यादा का लेट होते हुए अपमान करने के कारण वो जॉब पल्लवी को मिल चुकी थी "।
थोड़ी हिम्मत बांधकर वापस जाने के न लिए नीरा लोकल स्टेशन पहुंची, पानी पीने के लिए स्टेशन पर स्नैक्स कार्नर में कार्नर पे नीरा का फ़ोन बजा और उसमे "पल्लवी नायडू की अपने ऑफिस केबिन के साथ सेल्फी थी" ।
स्नैक्स कार्नर के रेडियो पर फ़िल्म बजरंगी भाईजान का प्रसिद्ध गाना "चले बेटा सेल्फी लेले रे" बज रहा था।
दुःख का दर्द इतना तीव्र था की नीरा अपने अश्रुओं को रोक न सकी।
ट्रेन में नीरा के दोस्तों के मेसेज आते रहे ,नीरा ! क्या हुआ तेरे इंटरव्यू?
तुझे जॉब मिल गयी न?
पूरे 2 घंटे हो गए ,तेरी सेल्फी नहीं आई अब तक?
बिना किसी मेसेज किये नीरा ने सेल्फी से मन ही मन हमेशा हमेशा के लिए विदा ली।
अगली सुबह ,खुद को ढांढस बांधते हुए नीरा अगली कंसल्टेंसी में अप्लाई करने निकल पड़ी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,


## : - किसी भी वास्तु या क्रिया का जरुरत से ज्यादा इंसान से जुड़ाव सिर्फ और सिर्फ नुकसानदायक परिणाम लेकर आता है , फिर चाहे वो सेल्फी क्यों न हो !

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