भोपाल में होशंगाबाद हाईवे पर स्थित साकेत नगर के 9B सेक्टर के मकान नं 167 के मालिक 57 वर्षीय "नारायण विष्णु दशपुत्रे" का घर तड़के सुबह के 4 बजे , आरती की घंटियों से सराबोर हो उठता।
श्रीमद् भगवद् गीता, बजरंग बांड, महाभारत, रामायण, कैवल्य उपनिषद, प्रकाष्ठ योगसंहिता और "गीता प्रेस" गोरखपुर (उ.प्र) से प्रकाशित ऐसे कई महान् ग्रंथों का शुद्ध संस्कृत में सम्पूर्ण कंठस्त ज्ञान रखने वाले और , मध्य प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में बतौर चीफ इंजीनियर के पद पर कार्यरत "दशपुत्रेजी" अपने आप को ब्रम्हत्व जीवन शैली का स्वामी और प्रकांड विद्वान् मानते थे।
साकेत नगर के बिल्कुल समीप लगे भोपाल के दो सुप्रसिद्ध शिक्षण संस्थान "बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय" और "ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (एम्स)" के स्थित होने की वजह से साकेत नगर के सभी सेक्टर्स के 90 फीसदी से ज्यादा घरों में इन शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी किराये से रहते थे, जिस वजह से पूरा साकेत नगर विद्यार्थिमय् रहता।
साकेत नगर के सभी स्थानीय लोगों की तरह, दशपुत्रेजी ने भी अपने 2000 वर्गफुट के घर के 3 कमरों को किराये पर दे रखा था, जिसमे ऊपर के 3 कमरों में , आदित्यनाथ शुक्ला (एम्स में एंडोक्रिनोलॉजि में एम डी के छात्र), शिवाकांत उपाध्याय (बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय में सिविल इंजीनियरिंग में बी ई के सातवें सेमेस्टर के छात्र), विवेक झा (रीजनल रिसर्च लैबोरेट्री, आर आर एल, में जूनियर साइंटिस्ट) रहते थे।
निः संतान दंपति के रूप में दशपुत्रेजी और उनकी धर्मपत्नी शीला जो की केंद्रीय विद्यालया की प्राचार्या थी , ईश्वर की आराधना करते हुए अपना जीवन यापन कर रहे थे। हाई डायबिटीज के मरीज दशपुत्रेजी पूजा पाठ में इस कदर लीन रहते की प्रसाद के रूप में पूड़ी, हलवा घी इत्यादि के जबरदस्त सेवन की वजह से उन्हें टेबलेट्स की बजाय इन्सुलिन पर रहना पड़ रहा था। शीलाजी और आदित्यनाथ के लाख समझाने के बावजूद दशपुत्रेजी अपनी जिद पर अड़े रहते हुए उन्हें उलटी समझाइश देते की , सब प्रभु की माया है, मुझे वोही रोगमुक्त करेंगे।
आदित्यनाथ , वक़्त-वक़्त पर दशपुत्रेजी की डायबिटीज का एम्स में चेकअप करवाकर शुगर रीडिंग्स और इंसुलिन इंजेक्शन का मैनेजमेंट करते रहते।
आदित्यनाथ , वक़्त-वक़्त पर दशपुत्रेजी की डायबिटीज का एम्स में चेकअप करवाकर शुगर रीडिंग्स और इंसुलिन इंजेक्शन का मैनेजमेंट करते रहते।
9बी सेक्टर के बीचों बीच स्थित "मिश्रा मेस" साकेत नगर में रह रहे समस्त विद्यार्थियों के लिए भोजन का एकमात्र और सबसे सशक्त जरिया थी। मेस में काम कर रहे सभी लड़कों में से 16 वर्षीय "राकेश कुमार" जो की बिहार के "भागलपुर" जिले से काम की तलाश में भोपाल आया था , 9बी सेक्टर के सभी विद्यार्थियों में सबसे लोकप्रिय था।
मिश्राजी की एवन साइकिल पर 20 से अधिक टिफिन को लादकर समय से पहले सब तक पहुँचाने की तूफानी गति ही राकेश कुमार की लोकप्रियता का कारण थी, जिसकी वजह से सभी लोग राकेश कुमार को "राकेट" के नाम से जानते व् पुकारते थे।
राकेट की मेस में छुट्टी का दिन ,मिश्राजी और सभी विद्यार्थियों पर जबरदस्त रूप से भारी पड़ता था।
मिश्राजी की एवन साइकिल पर 20 से अधिक टिफिन को लादकर समय से पहले सब तक पहुँचाने की तूफानी गति ही राकेश कुमार की लोकप्रियता का कारण थी, जिसकी वजह से सभी लोग राकेश कुमार को "राकेट" के नाम से जानते व् पुकारते थे।
राकेट की मेस में छुट्टी का दिन ,मिश्राजी और सभी विद्यार्थियों पर जबरदस्त रूप से भारी पड़ता था।
दशपुत्रेजी के यहाँ रह रहे तीनों किरायेदारों की भूख भी बाकियों की तरह काफी हद तक रॉकेट पर निर्भर थी। पढाई की जबरदस्त जिज्ञासा रखने वाला राकेट , आदित्यनाथ भैया से मेडिकल के छोटे मोटे गुण सीखता , जैसे फर्स्ट ऐड वगेरह, आदित्यनाथ जब जब दशपुत्रेजी के इन्सुलिन का डोज़ सेट करते तब तब बड़ी लालसा से राकेट, भैया से उस बड़े से इंजेक्शन के बारे में पूछता। आदित्यनाथ, राकेट को डायबिटीज सम्बंधी मूल जानकारियां देते रहते।
जहाँ एक तरफ छोटी जात का होने की वजह से राकेट ,दशपुत्रेजी को फूटी आँख न भाता था, तोह वहीँ दूसरी ओर राकेट वक़्त वक़्त पर मौका मिलते ही दशपुत्रेजी की पूजन सामग्री, निदान संबंधी टोटके, व्रत फलाहार, त्यौहार दिवस इत्यादि में सुसज्जित स्वादिष्ट प्रसाद एवं महंगी चढोत्री पर मौज उड़ाता रहता। जिस वजह से दशपुत्रेजी का आक्रोश राकेट को देखते ही सातवें आसमान पर आ जाता। दशपुत्रेजी ने तीनो किरायेदारों को सख्त निर्देश देकर, राकेट की टिफिन पहुचाने की टाइमिंग इस कदर सेट की थी की राकेट उनके सामने न आये, क्योंकि उनका मानना था की उसे देखते ही उनका दिन अशुभ और पूजा पाठ भंग हो जाएगी।
रोजाना 167 में टिफिन पहुँचाने की वजह से राकेट, दशपुत्रेजी की दैनिक दिनचर्या की समय सारणी से बेहद अच्छी तरह वाकिफ था। जिसमे :-
सोमवार को जब दशपुत्रेजी भोलेनाथ के दर्शन कर भोजपुर से लौटते, तोह उनके ऑफिस जाने के बाद राकेट शीला आंटी से आग्रह कर प्रसाद जिसमे दूध, दही घी मेवे इत्यादि ले जाता। और बड़े मजे से सेवन करता।
मंगल को यही प्रक्रिया, टी टी नगर स्थित बजरंग बली की पूजा अर्चना के प्रसाद जिसमे राकेट के मनपसंद "खोवे के पेड़े", रहते,,, मिल जाते।
बुध और गुरु को साईनाथ का विशेष प्रसाद, शुद्ध घी से निर्मित मगज के लड्डू।
शनिवार को राकेट का ब्रेक क्योंकि उसमे तिल और तेल रहता।
पर रोजाना इतवार की शाम 7.30 बजे की 9बी सेक्टर और आर.आर.एल के बीचों बीच स्थित गणेश मंदिर की आरती के उपरांत प्रसाद वितरण में स्वादिष्ट मोदक, राकेट को इसलिए मिल जाते क्योंकि ठीक 8 बजे दशपुत्रेजी की मंदिर से और राकेट की टिफिन बांटकर लौटने की टाइमिंग एक दम मेल खाती।
सोमवार को जब दशपुत्रेजी भोलेनाथ के दर्शन कर भोजपुर से लौटते, तोह उनके ऑफिस जाने के बाद राकेट शीला आंटी से आग्रह कर प्रसाद जिसमे दूध, दही घी मेवे इत्यादि ले जाता। और बड़े मजे से सेवन करता।
मंगल को यही प्रक्रिया, टी टी नगर स्थित बजरंग बली की पूजा अर्चना के प्रसाद जिसमे राकेट के मनपसंद "खोवे के पेड़े", रहते,,, मिल जाते।
बुध और गुरु को साईनाथ का विशेष प्रसाद, शुद्ध घी से निर्मित मगज के लड्डू।
शनिवार को राकेट का ब्रेक क्योंकि उसमे तिल और तेल रहता।
पर रोजाना इतवार की शाम 7.30 बजे की 9बी सेक्टर और आर.आर.एल के बीचों बीच स्थित गणेश मंदिर की आरती के उपरांत प्रसाद वितरण में स्वादिष्ट मोदक, राकेट को इसलिए मिल जाते क्योंकि ठीक 8 बजे दशपुत्रेजी की मंदिर से और राकेट की टिफिन बांटकर लौटने की टाइमिंग एक दम मेल खाती।
गनेश मन्दिर से दशपुत्रेजी के घर का रास्ता काफी सुनसान रहता , वे रोजाना चहल कदमी करते हुए मन्दिर आरती के लिए जाते थे।
दबे पाँव पीछा करता राकेट, इस बात बेहद ख्याल रखता की दशपुत्रेजी उसे देख न लें, क्योंकि राकेट को अच्छी तरह याद रहता की 2 वर्ष पहले जब दशपुत्रेजी न घर की नजर उतरने हेतु टोटका करके घर के आगे की सड़क में टोटका सामग्री में मटका जिसमे नारियल, निम्बू, कुछ पैसे इत्यादि ऐसे व्यक्ति के उपयोग हेतु रखे थे, जिसका प्रवेश घर में न हो , पर थोड़ी ही देर में सामने से आ रहे राकेट ने बड़े मजे से मटके को उठाकर घर लेजाकर नारियल खा लिया और निम्बू का शरबत बनाकर पी लिया था । जिसके उपरांत दशपुत्रेजी ने राकेट की बेंत से जोरदार पिटाई की थी।
अपनी गति से गतिवान समय आगे बढ़ते हुए , भोपाल सहित मध्य प्रदेश पर चुनाव के बादल लेकर आया, बीजेपी की सरकार की सशक्त गूँज चारों ओर पुरजोर थीं, शीलाजी को भी चुनाव ड्यूटी पर देर रात तक संलग्न होना पड़ता।
पिछले कई दिनों की तरह, शीलाजी इ वी एम मशीन की लॉग एंट्री कर रहीं थीं, की अचानक उनके फ़ोन की घण्टी बज पड़ी !!!!!
पिछले कई दिनों की तरह, शीलाजी इ वी एम मशीन की लॉग एंट्री कर रहीं थीं, की अचानक उनके फ़ोन की घण्टी बज पड़ी !!!!!
फ़ोन पर आदित्यनाथ उन्हें सूचना देता है की , अंकलजी (दशपुत्रेजी) एम्स के विंग क्रमांक 3 के icu में एडमिट हैं, कृपया जल्दी पहुंचे।
असीम चिंताओं से भरी शीलाजी तूफानी गति से अस्पताल पहुंचकर देखतीं हैं की, icu के बाहर शिवानंद, विवेक, पडोसी त्रिपाठीजी, मिसिज़ शर्मा बैठे हैं, अंदर पहुंचकर वह देखतीं हैं की दशपुत्रेजी के बेड क पास सीनियर डॉक्टर चौधरी, आदित्यनाथ से चर्चा कर रहे हैं, चौधरी साब के जाते ही आदित्यनाथ , शीलाजी को दशपुत्रेजी की मेडिकल कंडीशन्स का विवरण देते हुए बताते हैं ,
अंकलजी ने जल्द बाजी में इन्सुलिन का गलत डोज़ सेट कर लिया था, जिसकी वजह से शाम को गणेश मंदिर से लौटते वक़्त उनकी शुगर 40 पहुँच गयी थी और वह अचानक मूर्छित होकर जमीन पर गिर पड़े थे, जिस वजह से उनके सर पर गम्भिर चोटें आयीं हैं, ct स्कैन की रिपोर्ट के मुताबिक ज्यादा चिंता की बात नहीं है।
आदित्यनाथ बताते हैं ,ऐसी स्थिति में अगर जल्द ही पेशेंट को फर्स्ट ऐड के रूप में शुगर न दी जाये तोह ,कार्डिएक अरेस्ट या पैरालिसिस जैसे गम्भीर परिणाम सामने आ सकते हैं। पर शुक्र है की अंकलजी को फर्स्ट ऐड समय पर मिल गया था।
अगली सुबह, स्थिति सामान्य होने के बाद जब दशपुत्रेजी अपने इर्द गिर्द सभी को देखकर मुस्कुराते हुए , आदित्यनाथ का शुक्रिया अदा करते ही हैं की अचानक आदित्यनाथ उन्हें बीच में रोककर बताते हैं की , अंकलजी !
अगर आपको शुक्रियादा करना ही है तोह हम में किसी का नहीं बल्कि "राकेट" का कीजिये , शीलाजी भी स्तब्ध निगाहों से आदित्यनाथ को देखते हुए सुनती हैं,
आदित्यनाथ बताते है। , जब कल रात आप गणेश मंदिर के समीप गिर पड़े थे , तोह मोदक की लालसा में हमेशा की तरह रॉकेट आपका पीछा कर रहा था, आपको ज़मीन पर पड़े देख और मेरी द्वारा आपकी डायबिटीज की जानकारी को ध्यान में रख राकेट समझ गया था की आपकी शुगर लो हो गयी है, उसने फौरन आप ही की थैली से मिठाई खिलाने की कोशिश की मगर , मुख अकड़ने की वजह से मिठाई अन्दर नहीं जा रही थी ,फिर उसने फ़ौरन मंदिर से मिश्री लेकर पानी के गिलास में घोलकर आपको पिलाया, जिससे आपकी शुगर नार्मल आने लगी पर सर की चोट की वजह से आपको होश नहीं आ रहा था।
रास्ता सुनसान और मोबाइल के अभाव की वजह से वह किसी से संपर्क नहीं कर पा रहा था, इतने में राकेट के मेस का साथी गुड्डू वहां से गुजर रहा था, जिसे राकेट ने फ़ौरन हाईवे से सटे फुटपाथ पर खड़े ऑटो को बुलाकर , और आपको उसमे बिठाकर सीधा यहाँ मेरे पास ले आया।
आदित्यनाथ बताते है। , जब कल रात आप गणेश मंदिर के समीप गिर पड़े थे , तोह मोदक की लालसा में हमेशा की तरह रॉकेट आपका पीछा कर रहा था, आपको ज़मीन पर पड़े देख और मेरी द्वारा आपकी डायबिटीज की जानकारी को ध्यान में रख राकेट समझ गया था की आपकी शुगर लो हो गयी है, उसने फौरन आप ही की थैली से मिठाई खिलाने की कोशिश की मगर , मुख अकड़ने की वजह से मिठाई अन्दर नहीं जा रही थी ,फिर उसने फ़ौरन मंदिर से मिश्री लेकर पानी के गिलास में घोलकर आपको पिलाया, जिससे आपकी शुगर नार्मल आने लगी पर सर की चोट की वजह से आपको होश नहीं आ रहा था।
रास्ता सुनसान और मोबाइल के अभाव की वजह से वह किसी से संपर्क नहीं कर पा रहा था, इतने में राकेट के मेस का साथी गुड्डू वहां से गुजर रहा था, जिसे राकेट ने फ़ौरन हाईवे से सटे फुटपाथ पर खड़े ऑटो को बुलाकर , और आपको उसमे बिठाकर सीधा यहाँ मेरे पास ले आया।
राकेट की अस्पताल देखने की तीव्र इक्षा को देखते हुए , एक बार मैंने उसे यहाँ अपना सेंटर दिखाया था।
इस तरह आप एक जबरदस्त खतरे से बहार आये हैं , अंकल।
इस तरह आप एक जबरदस्त खतरे से बहार आये हैं , अंकल।
आदित्यनाथ की बातोँ को सुन दशपुत्रेजी स्तब्ध रह गए, दो तीन के डिस्चार्ज के बाद घर लौटते वक़्त कार में , पिछले कुछ सालों के फ्लैशबैक को याद कर , दशपुत्रेजी की आखों से अश्रु नहीं रुक रहे थे, वे सोच रहे थे ,
की जिस मूर्ती में ईश्वर को खोजते हुए , अगम्य प्रसादों का भोग लगाकर में चमत्कार ढूंढ रहा था।
वही ईश्वर राकेट के रूप में मेरे पास ही था, जिसे में देख न सका। जिसके प्रसाद के सेवन से मैं आक्रोशित होता रहा , वही ईश्वर छुपकर प्रसाद चुराकर ,मुझ पर परोपकार करता रहा।
दशपुत्रेजी का "भ्रम" सदैव के लिए समाप्त हो रहा था,
की जिस मूर्ती में ईश्वर को खोजते हुए , अगम्य प्रसादों का भोग लगाकर में चमत्कार ढूंढ रहा था।
वही ईश्वर राकेट के रूप में मेरे पास ही था, जिसे में देख न सका। जिसके प्रसाद के सेवन से मैं आक्रोशित होता रहा , वही ईश्वर छुपकर प्रसाद चुराकर ,मुझ पर परोपकार करता रहा।
दशपुत्रेजी का "भ्रम" सदैव के लिए समाप्त हो रहा था,
उनके न रहने पर शीला की चिंता को ध्यान में रखते हुए , और सभी प्रसाद रुपी गरिष्ठ सामग्री के सेवन से परहेज की सौगंध लेते हुए , दशपुत्रेजी सीधे घर की बजाय मिश्रा मेस पहुँचते हैं।
जहां राकेट टिफिनों को भरने में मशगूल था, राकेट को गले से लगाते हुए दशपुत्रेजी ,मिश्राजी को कहते हैं अबसे राकेट की पढाई और रहन सहन का खर्च अब वही उठाएंगे।
कहते हुए दशपुत्रेजी ,राकेट को मोदक और मगज के लड्डुओं से भरे पैकेट देकर लौट जाते हैं
विकास पाण्डेय (१३/०९/२०१६)
Devendra Kumar Sen
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